वेनेजुएला में अमेरिकी ‘भूकंप’: मादुरो का अंत, रूस और चीन की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं पर सीधा प्रहार

जनवरी 2026 की शुरुआत में, दुनिया एक ऐसी भू-राजनीतिक घटना की गवाह बनी जिसने अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव हिला दी है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में अचानक किए गए बड़े पैमाने पर सैन्य हमले (‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉलल्व’) और निकोलस मादुरो की सरकार के पतन ने लातिन अमेरिका के राजनीतिक मानचित्र को तो बदला ही है, लेकिन इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव कराकस से हजारों मील दूर—मॉस्को और बीजिंग में महसूस किया जा रहा है।

जैसा कि समाचार ग्राफिक में दर्शाया गया है, यह घटना केवल वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बारे में नहीं है; यह रूस और चीन के लिए एक “भू-राजनीतिक भूकंप” (Geopolitical Earthquake) है। यह हमला उस रणनीतिक शतरंज की बिसात को पलट देता है जिसे ये दोनों महाशक्तियां पिछले दो दशकों से अमेरिका के “बैकयार्ड” (पश्चिमी गोलार्ध) में सावधानीपूर्वक बिछा रही थीं।

अमेरिका का 'मनरो सिद्धांत 2.0': शक्ति का क्रूर प्रदर्शन

अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपने प्रतिद्वंद्वियों के बढ़ते प्रभाव को अब और बर्दाश्त नहीं करेगा। इसे कई विश्लेषक 19वीं सदी के ‘मनरो सिद्धांत’ (Monroe Doctrine) का एक आक्रामक, 21वीं सदी का संस्करण मान रहे हैं।

दशकों तक, वेनेजुएला अमेरिका विरोधी धुरी का केंद्र रहा है, जिसने रूस और चीन को अमेरिकी मुख्य भूमि के करीब पैर जमाने का मौका दिया। मादुरो शासन को उखाड़ फेंककर, वाशिंगटन ने न केवल एक परेशान करने वाले पड़ोसी को हटाया है, बल्कि मास्को और बीजिंग को एक कड़ा संदेश भेजा है कि उनकी वैश्विक शक्ति की सीमाएं हैं, और अमेरिका अभी भी अपनी शर्तों पर खेल बदलने की क्षमता रखता है।

2026: क्या अमेरिका ने मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है?

पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया में केवल एक ही खबर छाई हुई है—अमेरिका की वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई। जो बातें अब तक केवल प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव तक सीमित थीं, वे अब एक बड़े सैन्य टकराव में बदल चुकी हैं।

Table of Contents

ऑपरेशन एबसॉल्यूट रिजॉल्व (Operation Absolute Resolve)

  • तारीख: 3 जनवरी 2026

  • घटना: अमेरिकी सेना ने एक विशेष सैन्य अभियान (Operation Absolute Resolve) के तहत वेनेजुएला की राजधानी काराकस में छापेमारी की।

  • नतीजा: इस ऑपरेशन में निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी (सिलिया फ्लोरेस) को पकड़ लिया गया। उन्हें तुरंत अमेरिका ले जाया गया, जहाँ वे अब न्यूयॉर्क में संघीय हिरासत में हैं।

  • न्यूयॉर्क की अदालत में पेशी: मादुरो को अमेरिका ले जाया गया है, जहाँ उन पर ‘नार्को-टेररिज्म’ (मादक पदार्थों की तस्करी) और हथियारों के अवैध व्यापार के आरोप लगाए गए हैं।
  • अमेरिकी तर्क: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इस कार्रवाई को ‘क्षेत्रीय सुरक्षा’ और ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ का नाम दिया है।
  •  

क्यों गिरफ्तार किया गया? (The Reasons)

नार्को-टेररिज्म (Narco-Terrorism): मादुरो पर आरोप है कि उन्होंने “कार्टेल ऑफ द सन” (Cartel of the Suns) नामक संगठन का नेतृत्व किया, जो एक ड्रग तस्करी गिरोह है। अमेरिका का दावा है कि मादुरो ने अपनी सत्ता का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर कोकीन की तस्करी की।

2020 का अभियोग (Indictment): अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने मादुरो पर साल 2020 में ही नार्को-टेररिज्म, कोकीन तस्करी की साजिश और हथियार रखने जैसे आरोप लगाए थे। उनकी गिरफ्तारी पर 1.5 करोड़ डॉलर (बाद में इसे बढ़ाकर 2.5 करोड़ और फिर 5 करोड़ डॉलर तक कर दिया गया था) का इनाम भी रखा गया था।

अवैध चुनाव और तानाशाही: अमेरिका और कई अन्य देश 2024 में हुए वेनेजुएला के चुनावों को “फर्जी” मानते थे और मादुरो को देश का वैध राष्ट्रपति नहीं मानते थे।

वर्तमान स्थिति फिलहाल मादुरो न्यूयॉर्क की एक अदालत में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकारा है (pleaded not guilty)। वहीं, वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है, हालाँकि अमेरिका ने वहां एक नई अंतरिम सरकार के गठन का समर्थन किया है।

हमले के पीछे के मुख्य कारण

आखिर अमेरिका ने इस समय इतना बड़ा कदम क्यों उठाया? इसके तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:

2024 के विवादित चुनाव: 2024 के वेनेजुएला चुनावों में मादुरो की जीत को अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने ‘धोखाधड़ी’ करार दिया था। तब से ही वहां राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई थी।
तेल और ऊर्जा संकट: वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अमेरिका ने 2025 के अंत में वेनेजुएला के तेल टैंकरों की नाकेबंदी शुरू कर दी थी, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ गईं।
*  प्रवास (Migration) का मुद्दा: ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि मादुरो सरकार ने जानबूझकर अपराधियों को रिहा किया और उन्हें अमेरिकी सीमा की ओर भेजा।

  • दुनिया की प्रतिक्रिया और भारत पर असर
  • इस घटना ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है:

विरोध: रूस, चीन, ईरान और ब्राजील जैसे देशों ने इसे वेनेजुएला की संप्रभुता (Sovereignty) का उल्लंघन बताया है।
भारत के लिए चिंता: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल आयात पर निर्भर है। वेनेजुएला में युद्ध जैसे हालात होने से कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का डर है।

चीन का आर्थिक और ऊर्जा संकट (शी जिनपिंग की चिंता का विश्लेषण)

    • छवि में शी जिनपिंग के विचार बुलबुले में पैसे के बंडल और एक तेल टैंकर को दिखाया गया है, जो चीन की आर्थिक और संसाधन-आधारित vulnerablity (भेद्यता) को उजागर करता है। चीन के लिए यह संकट सैन्य से अधिक आर्थिक है:

      1. अरबों डॉलर का डूबता कर्ज: चीन वेनेजुएला का सबसे बड़ा लेनदार (Creditor) था। पिछले दो दशकों में, चीन ने वेनेजुएला को बुनियादी ढांचे और विकास के लिए लगभग 60 अरब डॉलर का ऋण दिया था, जिसे मुख्य रूप से तेल शिपमेंट के माध्यम से चुकाया जाना था। अमेरिकी हमले के बाद बनी अराजकता और संभावित नई सरकार द्वारा पुराने कर्जों को मानने से इनकार करने की स्थिति में, चीन का यह विशाल निवेश डूबने के कगार पर है। यह चीन की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) जैसी वैश्विक ऋण कूटनीति के लिए एक बड़ा झटका है।

      2. ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा: दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक के रूप में, चीन अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविधतापूर्ण स्रोतों पर निर्भर है। वेनेजुएला, दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश के रूप में, चीन की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। यदि वेनेजुएला का तेल उद्योग अब अमेरिकी नियंत्रण या प्रभाव में आता है, तो चीन को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य, संभावित रूप से अधिक महंगे या राजनीतिक रूप से कठिन स्रोतों (जैसे मध्य पूर्व) पर अपनी निर्भरता बढ़ानी होगी।

      3. ‘सुरक्षित विकल्प’ की छवि को नुकसान: चीन खुद को विकासशील देशों के लिए पश्चिमी वित्तीय संस्थानों के विकल्प के रूप में पेश करता है, जो बिना किसी राजनीतिक शर्त के ऋण देता है। लेकिन जब अमेरिका ने सैन्य बल का प्रयोग किया, तो चीन अपनी आर्थिक ताकत के बावजूद अपने साथी को नहीं बचा सका। यह अन्य देशों को चीन के साथ गहरे संबंध बनाने से पहले दो बार सोचने पर मजबूर करेगा।

      4. रूस और चीन के लिए, यह “भूकंप” एक कड़वी सच्चाई लेकर आया है: वे आर्थिक और कूटनीतिक रूप से अमेरिका को चुनौती दे सकते हैं, लेकिन जब अमेरिका अपनी पूरी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने का फैसला करता है, विशेष रूप से अपने भौगोलिक पड़ोस में, तो मास्को और बीजिंग के पास उसे रोकने के सीमित विकल्प हैं। आने वाले महीनों में, दुनिया देखेगी कि ये दोनों घायल दिग्गज इस रणनीतिक झटके का जवाब कैसे देते हैं—क्या वे पीछे हटेंगे, या वे दुनिया के किसी अन्य हिस्से (जैसे ताइवान या पूर्वी यूरोप) में तनाव बढ़ाकर जवाबी कार्रवाई करेंगे।

महंगा होने का डर है। क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है?

बाबा वेंगा और नास्त्रेदमस जैसी भविष्यवाणियों का हवाला देते हुए कुछ लोग इसे बड़े युद्ध का संकेत मान रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी सीनेट (वहां की संसद) में अब ट्रंप की ‘युद्ध शक्तियों’ को सीमित करने के लिए प्रस्ताव पेश किए जा रहे हैं, ताकि संघर्ष को और बढ़ने से रोका जा सके।
तनाव की शुरुआत कैसे हुई?

अमेरिका और वेनेजुएला के संबंध हमेशा से खराब नहीं थे। लेकिन 1999 में ह्यूगो शावेज के राष्ट्रपति बनने के बाद स्थिति बदल गई। शावेज ने ‘समाजवाद’ का रास्ता अपनाया और अमेरिकी नीतियों की खुलकर आलोचना की।

तेल का खेल: वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अमेरिका इस पर अपना प्रभाव चाहता था, जबकि वेनेजुएला ने अपनी तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया।
निकोलस मादुरो का दौर: शावेज के बाद मादुरो के शासनकाल में आर्थिक संकट गहरा गया, जिसे अमेरिका ने “मानवाधिकारों का हनन” बताया।

क्या कभी सैन्य हमला (Attack) हुआ है?

आधिकारिक तौर पर अमेरिका ने वेनेजुएला पर कभी सीधा सैन्य आक्रमण नहीं किया है, लेकिन कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जिन्हें वेनेजुएला ‘हमला’ मानता है:

आर्थिक प्रतिबंध (Economic Sanctions): अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। वेनेजुएला इसे “आर्थिक युद्ध” कहता है।
तख्तापलट की कोशिशें: 2002 में शावेज के खिलाफ और हाल के वर्षों में मादुरो के खिलाफ हुए विद्रोहों में वेनेजुएला ने सीधे तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का हाथ होने का आरोप लगाया है।
ऑपरेशन गिदोन (2020): वेनेजुएला सरकार का दावा है कि अमेरिकी भाड़े के सैनिकों ने देश में घुसपैठ कर मादुरो को पकड़ने की कोशिश की थी।

अमेरिका के लिए वेनेजुएला क्यों महत्वपूर्ण है?

अमेरिका की रणनीति के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण माने जाते हैं:
• ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल।
• रूस और चीन का प्रभाव: वेनेजुएला के रूस और चीन के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों को अमेरिका अपने क्षेत्र (पश्चिमी गोलार्ध) के लिए खतरा मानता है।
• लोकतंत्र की बहाली: अमेरिका का तर्क है कि वह वहां निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र वापस लाना चाहता है।
मौजूदा स्थिति क्या है?
हाल के समय में, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक तेल संकट पैदा हुआ। इस वजह से अमेरिका ने वेनेजुएला पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है ताकि तेल की आपूर्ति बनी रहे। इससे संकेत मिलते हैं कि फिलहाल अमेरिका सैन्य हमले के बजाय कूटनीति और बातचीत पर ध्यान दे रहा है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version