अमेरिकी अर्थव्यवस्था एक लम्बे समय से डॉलर आधारित फिएट सिस्टम पर चल रही है, जहाँ मुद्रा का मूल्य किसी भौतिक संपत्ति से जुड़ा नहीं होता। ऐसे समय में पूर्व आर्थिक सलाहकार और “साउंड मनी” की समर्थक ज्यूडी शेल्टन ने एक प्रस्ताव रखा है कि अमेरिका को गोल्ड-बैक्ड ट्रेज़री बॉन्ड जारी करने चाहिए, ताकि डॉलर में स्थिरता और वैश्विक विश्वास वापस लौट सके।
उनका प्रस्ताव मुख्य रूप से ‘स्वर्ण-समर्थित बॉन्ड’ (Gold-Backed Bonds) जारी करने पर केंद्रित है। इसका मतलब है कि अमेरिकी सरकार ऐसे बॉन्ड जारी करेगी जिनका मूल्य या ब्याज सोने की कीमत से जुड़ा होगा, जिससे निवेशकों को डॉलर के अवमूल्यन से सुरक्षा मिल सके।

ज्यूडी शेल्टन, जो एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और फेडरल रिजर्व बोर्ड के लिए पूर्व नामित सदस्य रही हैं, लंबे समय से मुद्रा की स्थिरता के लिए सोने की वकालत करती रही हैं। उनका तर्क है कि वर्तमान ‘फिएट’ मुद्रा प्रणाली (जहाँ पैसे का मूल्य सरकार के भरोसे पर निर्भर है) अस्थिर है और मुद्रास्फीति को बढ़ावा देती है।
उनका कहना है कि ऐसी प्रणाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी मुद्रा की विश्वसनीयता बढ़ा सकती है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भविष्य की अनिश्चितताओं से सुरक्षित कर सकती है।
📌 गोल्ड-बैक्ड बॉन्ड क्या हैं?
गोल्ड-बैक्ड बॉन्ड ऐसी सरकारी प्रतिभूतियाँ (Treasury Bonds) होती हैं जिन्हें सोने से समर्थित किया जाता है।
यानी, बॉन्ड धारक को परिपक्वता समय पर:
✔ या तो सोने में भुगतान
✔ या उसके मूल्य के बराबर डॉलर में भुगतान
का विकल्प मिल सकता है।
ऐसी प्रणाली 1971 से पहले के गोल्ड स्टैंडर्ड से कहीं मिलती-जुलती मानी जाती है।
1. “ट्रेजरी ट्रस्ट बॉन्ड्स” (Treasury Trust Bonds) का प्रस्ताव
शेल्टन ने एक नए प्रकार के सरकारी बॉन्ड का प्रस्ताव दिया है जिसे वह “ट्रेजरी ट्रस्ट बॉन्ड” कहती हैं।
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गोल्ड कन्वर्टीबिलिटी: इन बॉन्ड्स की खासियत यह होगी कि जब ये मैच्योर (पूरे) होंगे, तो निवेशक के पास विकल्प होगा कि वह अपना पैसा डॉलर में ले या उसके बराबर की कीमत के सोने (Gold) में।
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उद्देश्य: इसका उद्देश्य निवेशकों को मुद्रा के अवमूल्यन (devaluation) से बचाना है।
2. 50-वर्षीय गोल्ड-कन्वर्टीबल बॉन्ड
हाल के बयानों में उन्होंने 50 साल की अवधि वाले ट्रेजरी बॉन्ड्स जारी करने की बात कही है।
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कम ब्याज दर: उनका तर्क है कि चूंकि ये बॉन्ड सोने की गारंटी के साथ आएंगे, इसलिए सरकार इन्हें बहुत कम ब्याज दर पर जारी कर सकती है, क्योंकि लोग अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए प्रीमियम देने को तैयार होंगे।
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फिस्कल डिसिप्लिन: यह सरकार को अंधाधुंध कर्ज लेने से रोकेगा, क्योंकि अंततः कर्ज चुकाने के लिए सोने का बैकअप जरूरी होगा।
3. फेडरल रिजर्व (Fed) की आलोचना
शेल्टन वर्तमान “फिएट करेंसी” (कागजी मुद्रा) सिस्टम और फेडरल रिजर्व की नीतियों की कड़ी आलोचक हैं। उनका कहना है:
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फेडरल रिजर्व के पास ब्याज दरें तय करने की बहुत ज्यादा शक्ति है, जो “सोवियत शैली की केंद्रीय योजना” (Central Planning) जैसा है।
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सोने से जुड़े बॉन्ड बाजार को यह तय करने की शक्ति देंगे कि डॉलर की असली कीमत क्या होनी चाहिए, न कि कुछ अधिकारियों को।
4. अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ (2026) का लक्ष्य
उन्होंने सुझाव दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ (4 जुलाई, 2026) के अवसर पर इन गोल्ड-समर्थित बॉन्ड्स की शुरुआत करनी चाहिए। यह दुनिया को एक संदेश होगा कि अमेरिका अपनी मुद्रा की ईमानदारी और स्थिरता को फिर से बहाल कर रहा है।
सकारात्मक पहलू (फ़ायदे)
1. डॉलर की विश्वसनीयता बढ़ेगी
सोना वैश्विक स्तर पर मूल्यवान माना जाता है, इसलिए ऐसा बॉन्ड विदेशी निवेशकों को आकर्षित करेगा।
2. विदेशी केंद्रीय बैंकों के लिए आकर्षक
चीन, भारत, रूस सहित कई देश सोना जमा कर रहे हैं—ऐसा बॉन्ड उन्हें निवेश के नए विकल्प देगा।
3. अमेरिकी ऋण बाजार मजबूत
अमेरिकी ट्रेज़री बाज़ार दुनिया का सबसे बड़ा सुरक्षित निवेश माना जाता है। सोना इसे और मजबूत कर सकता है।
4. आर्थिक अनुशासन
सरकारी खर्च और बैंक नोट छापने पर स्वाभाविक सीमा लगेगी।
🔴 नकारात्मक पहलू (जोखिम / कमी)
1. सोने की सीमित उपलब्धता
सरकारी ऋण असीमित है—पर सोना सीमित।
यह मॉडल दीर्घकाल में संतुलित रहना मुश्किल बना सकता है।
2. वित्तीय लचीलापन खत्म
फेडरल रिज़र्व की सबसे बड़ी शक्ति—Monetary Flexibility—कम हो जाएगी।
3. महंगा और जटिल मॉडल
सोने की मांग बढ़ेगी जिससे खरीद और भंडारण लागत बढ़ेगी।
4. राजनीतिक विरोध
अमेरिकी वित्तीय प्रणाली दशकों से ऋण आधारित है—इसे बदलना राजनीतिक रूप से कठिन होगा।
मुख्य लाभ जो शेल्टन गिनाती हैं:
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महंगाई से सुरक्षा: चूंकि सोने की आपूर्ति सीमित है, इसलिए यह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करता है।
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डॉलर की वैश्विक साख: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक और निवेशक फिर से डॉलर पर भरोसा कर सकेंगे।
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निवेशकों के लिए आकर्षण: लोग उन संपत्तियों में निवेश करना पसंद करेंगे जिनका मूल्य सुरक्षित रहे।
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3. उनके विचारों का मूल सार (Core Philosophy)
उनकी सभी रचनाओं में तीन बातें बार-बार आती हैं:
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मुद्रा की नैतिकता (Moral Money): वह मानती हैं कि मुद्रा की वैल्यू गिराना जनता की बचत चुराने के समान है।
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लोकतंत्र और सोना: उनका कहना है कि सोने पर आधारित सिस्टम ‘लोकतांत्रिक’ है क्योंकि यह पैसे की ताकत राजनेताओं के हाथ से छीनकर जनता और बाजार को देता है।
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अंतरराष्ट्रीय समन्वय: वह एक नए वैश्विक समझौते की मांग करती हैं (जैसे ब्रेटन वुड्स II), ताकि दुनिया भर की मुद्राएं स्थिर हो सकें।
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यील्ड स्प्रेड (Yield Spread): एक मानक 50-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड और स्वर्ण-समर्थित TTB की ब्याज दरों की तुलना करके, फेड यह देख सकेगा कि बाजार मुद्रा अवमूल्यन के जोखिम के लिए कितनी कीमत लगा रहा है।
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जवाबदेही: यदि TTB पर प्रीमियम अधिक है, तो यह वास्तविक समय में संकेत होगा कि बाजार को मुद्रास्फीति प्रबंधन में फेड पर भरोसा नहीं है।
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विकल्प A: अमेरिकी डॉलर में बॉन्ड का पूरा अंकित मूल्य (Face Value)।
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विकल्प B: सोने का एक पूर्व-निर्धारित और निश्चित वजन।
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1. परिपक्वता पर दोहरी अदायगी (Dual Redemption at Maturity)
इस प्रस्ताव की मुख्य विशेषता एक “विकल्प खंड” (Option Clause) है। बॉन्ड की अवधि समाप्त होने पर, निवेशक अपनी अदायगी के लिए दो विकल्प चुन सकता है:
रणनीति: यह एक “विश्वास करें लेकिन जांचें” (Trust-but-verify) तंत्र बनाता है। यदि सरकार डॉलर का प्रबंधन अच्छी तरह करती है, तो निवेशक नकद लेंगे। यदि डॉलर का मूल्य गिरता है, तो वे सोना लेंगे, जो प्रभावी रूप से मुद्रास्फीति के लिए ट्रेजरी पर जुर्माना होगा।
2. अति-दीर्घकालिक परिपक्वता (50-76 वर्ष)
शेल्टन ने हाल ही में 50-वर्षीय बॉन्ड का सुझाव दिया है।
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2026/2076 का दृष्टिकोण: उन्होंने 4 जुलाई, 2026 (अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ) पर इसे लॉन्च करने और 2076 (300वीं वर्षगांठ) में इसकी परिपक्वता तिथि रखने का समर्थन किया है।
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लक्ष्य: यह लंबी अवधि नीति निर्माताओं को 2-4 साल के चुनावी चक्रों से आगे सोचने और डॉलर को आधी सदी के लिए स्थिर करने पर मजबूर करती है।
3. जीरो-कूपन संरचना (Zero-Coupon Structure)
शेल्टन की कल्पना है कि ये बॉन्ड जीरो-कूपन होंगे, जिसका अर्थ है कि इनमें समय-समय पर ब्याज नहीं दिया जाएगा।
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इसके बजाय, इन्हें इनके अंकित मूल्य से भारी छूट (Discount) पर बेचा जाएगा।
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निवेशक का “मुनाफा” खरीद मूल्य और दशकों बाद प्राप्त सोने या नकद के मूल्य के बीच का अंतर होगा।
4. बाजार-संचालित “ईमानदारी जांच” (Market-Driven Integrity Check)
शेल्टन इन बॉन्ड्स को फेडरल रिजर्व के लिए एक शक्तिशाली सूचना उपकरण के रूप में देखती हैं।
5. अमेरिकी स्वर्ण भंडार का पुनर्मूल्यांकन (Revaluing U.S. Gold Reserves)
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वर्तमान में अमेरिका अपने सोने को किताबों में $42.22 प्रति औंस की “वैधानिक कीमत” पर दर्ज करता है।
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छिपी हुई संपत्ति: शेल्टन का कहना है कि वर्तमान बाजार कीमतों (जैसे $2,700/औंस) पर, अमेरिकी स्वर्ण भंडार का मूल्य आधिकारिक $11 बिलियन के बजाय लगभग $700 बिलियन से $1 ट्रिलियन के बीच है।
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संपार्श्विक (Collateral): वे इन बॉन्ड्स को जारी करने के लिए इस “छिपी हुई” संपत्ति को गारंटी के रूप में उपयोग करने का प्रस्ताव देती हैं, जिससे सरकार की उधारी लागत कम हो सकती है।
6. भू-राजनीतिक और प्रतीकात्मक शक्ति (Geopolitical & Symbolic Power)
शेल्टन इस प्रस्ताव को वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अमेरिका के नेतृत्व को बनाए रखने के तरीके के रूप में देखती हैं।
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डी-डॉलराइजेशन का जवाब: चीन और रूस जैसे देशों द्वारा सोने का भंडार बढ़ाने के जवाब में, शेल्टन का मानना है कि अमेरिका को स्वर्ण-परिवर्तनीय सुरक्षा (Security) प्रदान करने वाली एकमात्र प्रमुख शक्ति बनकर उनसे आगे निकलना चाहिए।
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नैतिक उद्देश्य: वे अक्सर पैसे को एक “मानव अधिकार” के रूप में वर्णित करती हैं, जिसका मूल्य किसी केंद्रीय समिति द्वारा हेरफेर नहीं किया जाना चाहिए
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तुलनात्मक विश्लेषण: शेल्टन का प्रस्ताव बनाम वर्तमान फेड नीति
विशेषता ज्यूडी शेल्टन का प्रस्ताव (स्वर्ण समर्थित) वर्तमान फेडरल रिजर्व नीति (फिएट प्रणाली) मुद्रा का आधार सोना: मुद्रा का मूल्य सोने की एक निश्चित मात्रा से जुड़ा होता है। सरकारी भरोसा: मुद्रा का मूल्य सरकार की साख और अर्थव्यवस्था की मजबूती पर निर्भर है। मुद्रा आपूर्ति सीमित: केवल उतना ही पैसा या बॉन्ड जारी हो सकते हैं जितना सोना उपलब्ध हो। लचीली: फेड अर्थव्यवस्था की जरूरत के अनुसार मुद्रा की आपूर्ति घटा या बढ़ा सकता है। मुद्रास्फीति नियंत्रण प्राकृतिक नियंत्रण: पैसा छापने की सीमा होने से महंगाई पर लगाम रहती है। नीतिगत नियंत्रण: ब्याज दरों (Interest Rates) के माध्यम से महंगाई को नियंत्रित करने का प्रयास। संकट प्रबंधन कठिन: मंदी के समय सरकार आसानी से राहत पैकेज या नकदी (Stimulus) जारी नहीं कर सकती। प्रभावी: संकट के समय बाजार में तुरंत नकदी डालकर अर्थव्यवस्था को सहारा दिया जा सकता है। ब्याज दरें बाजार आधारित: दरें मुख्य रूप से सोने की मांग और आपूर्ति से तय होती हैं। निर्धारित: फेड की ‘ओपन मार्केट कमेटी’ आर्थिक लक्ष्यों को पाने के लिए दरें तय करती है। मुख्य लक्ष्य मूल्य स्थिरता: डॉलर की क्रय शक्ति को लंबे समय तक बनाए रखना। अधिकतम रोजगार: मूल्य स्थिरता के साथ-साथ बेरोजगारी कम रखने पर जोर।
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1. भारतीय रुपये पर प्रभाव (Impact on Indian Rupee)
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डॉलर की अत्यधिक मजबूती: स्वर्ण समर्थित बॉन्ड अमेरिकी डॉलर को दुनिया की सबसे सुरक्षित संपत्ति बना देंगे। ऐसे में दुनिया भर के निवेशक उभरते बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकालकर अमेरिका में लगाएंगे। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो सकता है।
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आयात महंगा होना: यदि रुपया गिरता है, तो भारत के लिए कच्चा तेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों का आयात बहुत महंगा हो जाएगा, जिससे देश के भीतर महंगाई बढ़ सकती है।
2. विदेशी निवेश का बहिर्वाह (Foreign Investment Outflow)
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वर्तमान में विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार में निवेश करते हैं क्योंकि यहाँ रिटर्न बेहतर मिलता है।
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लेकिन अगर अमेरिका सोने की गारंटी वाले बॉन्ड देता है, तो जोखिम कम होने के कारण निवेशक अपना पैसा भारतीय बाजार से निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में डाल सकते हैं। इसे “Capital Flight” कहा जाता है, जिससे भारतीय शेयर बाजार गिर सकता है।
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1. 1991 का आर्थिक संकट: जब भारत को सोना गिरवी रखना पड़ा
यह भारतीय इतिहास का सबसे भावुक और गंभीर उदाहरण है।
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स्थिति: 1991 में भारत के पास केवल दो हफ्ते के आयात के लिए विदेशी मुद्रा बची थी। देश ‘डिफ़ॉल्ट’ होने की कगार पर था।
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असर: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से कर्ज लेने के लिए भारत सरकार को अपने रिजर्व बैंक का 47 टन सोना लंदन और स्विट्जरलैंड के बैंकों में गिरवी रखना पड़ा था।
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सीख: इस घटना ने साबित किया कि संकट के समय सोना ही भारत की आखिरी उम्मीद (Lender of Last Resort) बनता है। इसके बाद ही भारत में बड़े आर्थिक सुधार (LPG) हुए।
2. 2013 का ‘टेपर टैंट्रम’ (Taper Tantrum) और स्वर्ण आयात पर प्रतिबंध
जब अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति बदलने के संकेत दिए, तो भारत पर भारी असर पड़ा।
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स्थिति: 2013 में वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें अस्थिर थीं, लेकिन भारतीय लोग भारी मात्रा में सोना खरीद रहे थे। इससे भारत का चालू खाता घाटा (CAD) खतरनाक स्तर पर पहुँच गया।
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असर: सरकार और RBI को सोने के आयात पर 80:20 का सख्त नियम और भारी इंपोर्ट ड्यूटी लगानी पड़ी ताकि डॉलर को बाहर जाने से रोका जा सके। उस समय रुपये की वैल्यू रिकॉर्ड स्तर तक गिर गई थी।
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सीख: भारत को समझ आया कि सोने की अत्यधिक मांग देश की मुद्रा (रुपये) को कमजोर कर सकती है।
3. 2009 का IMF स्वर्ण खरीद (वैश्विक मंदी के बाद)
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स्थिति: 2008 की वैश्विक मंदी के बाद जब डॉलर पर भरोसा थोड़ा डगमगाया, तब भारत ने एक बड़ा कदम उठाया।
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असर: भारत के केंद्रीय बैंक (RBI) ने IMF से 200 टन सोना खरीदा। उस समय सोने की कीमतें बढ़ रही थीं। इस कदम ने दुनिया को संकेत दिया कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने के लिए डॉलर से हटकर सोने पर भरोसा कर रहा है।
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सीख: इस खरीद ने भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती दी और वैश्विक बाजार में भारत की साख बढ़ाई।
संक्षेप में प्रभाव:
घटना सोने की स्थिति भारत पर परिणाम 1991 संकट सोना गिरवी रखा गया देश की साख बची, आर्थिक सुधार शुरू हुए। 2013 नीति आयात पर प्रतिबंध रुपये को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़े। 2020-22 (Covid) कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर आम लोगों ने ‘गोल्ड लोन’ लेकर अपनी जरूरतों को पूरा किया। -
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प्रश्न 1: गोल्ड-बैक्ड बॉन्ड क्या होते हैं?
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ऐसे बॉन्ड जो सोने से समर्थित हों और जिन्हें सोने या उसके मूल्य में बदला जा सके।
प्रश्न 2: क्या अमेरिका पहले गोल्ड स्टैंडर्ड पर था?
हाँ, 1971 से पहले अमेरिका आंशिक गोल्ड स्टैंडर्ड पर चल रहा था।
प्रश्न 3: क्या
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सिद्धांततः हाँ, क्योंकि पैसा छापने की सीमा हो जाती है।
प्रश्न 4: क्या यह व्यावहारिक है?
यह आर्थिक और राजनीतिक दोनों रूप से चुनौतीपूर्ण है। गोल्ड-बैक्ड सिस्टम मुद्रास्फीति को रोकता है?
निष्कर्ष
भारत के लिए अमेरिका का यह कदम एक “दोधारी तलवार” जैसा होगा। एक तरफ यह डॉलर को स्थिरता देगा, लेकिन दूसरी तरफ यह भारत जैसे विकासशील देशों से पूंजी खींच सकता है और सोने की कीमतों को सामान्य व्यक्ति की पहुंच से दूर कर सकता है।
- ज्यूडी शेल्टन का प्रस्ताव यदि लागू होता है, तो भारत को फिर से वैसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है जैसी 2013 में आई थीं। सोने की कीमतों में उछाल भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बढ़ा सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से खरीदता है।