संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने नागरिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 1 जनवरी, 2026 से, सॉफ्ट ड्रिंक्स पर लगने वाले टैक्स के नियमों में पूरी तरह बदलाव कर दिया गया है। अब टैक्स इस बात पर नहीं लगेगा कि बोतल कितनी बड़ी है, बल्कि इस बात पर लगेगा कि उसमें चीनी (Sugar) कितनी है।

क्या है नया नियम?

अब तक सभी मीठे पेय पदार्थों पर एक समान 50% उत्पाद शुल्क (Excise Tax) लगता था। लेकिन नए कानून के अनुसार, ड्रिंक्स को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. कम चीनी (Exempt): जिन पेय पदार्थों में प्रति 100 ml में 5 ग्राम से कम चीनी है, उन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। ये आपकी सेहत और जेब दोनों के लिए बेहतर हैं।

  2. मध्यम चीनी (Dh0.79/Litre): जिनमें 5 ग्राम से 8 ग्राम के बीच चीनी है, उन पर 0.79 दिरहम प्रति लीटर का टैक्स लगेगा।

  3. अधिक चीनी (Dh1.09/Litre): आपकी पसंदीदा कोला या सोडा, जिनमें 8 ग्राम से ज्यादा चीनी होती है, अब सबसे महंगे होंगे। इन पर 1.09 दिरहम प्रति लीटर का टैक्स वसूला जाएगा।

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यह बदलाव क्यों ज़रूरी था?

UAE सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

1. मोटापे पर लगाम: अत्यधिक चीनी का सेवन मोटापे का सबसे बड़ा कारण है।

2.डायबिटीज से बचाव: मीठे पेय पदार्थों के कम सेवन से मधुमेह के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।

3.कंपनियों को प्रोत्साहन: अब कंपनियां अपने फॉर्मूले में बदलाव करेंगी ताकि वे कम टैक्स वाली श्रेणी में आ सकें, जिससे अंततः ग्राहकों को स्वस्थ विकल्प मिलेंगे।

सुपरमार्केट में अब क्या बदलेगा?
जब आप अगली बार स्टोर जाएंगे, तो आपको बच्चों के जूस, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स की कीमतों में अंतर दिखाई देगा। “लो-शुगर” या “जीरो-शुगर” वाले विकल्प अब अधिक किफ़ायती होंगे।

पुराना नियम बनाम नया नियम: क्या बदला है?

पहले, UAE में मीठे पेय पदार्थों पर एक सामान्य 50% उत्पाद शुल्क लगाया जाता था, चाहे उनमें चीनी की मात्रा कुछ भी क्यों न हो। यह एक सरल लेकिन कम प्रभावी प्रणाली थी, क्योंकि यह कंपनियों को अपने उत्पादों में चीनी कम करने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं देती थी।

लेकिन, नए नियम के तहत, पेय पदार्थों को उनमें मौजूद चीनी की मात्रा के आधार पर तीन अलग-अलग टैक्स स्लैब में वर्गीकृत किया गया है। यह एक “जितनी चीनी, उतना टैक्स” का मॉडल है, जो कहीं अधिक तर्कसंगत और स्वास्थ्य-उन्मुख है।

आइए इसे विस्तार से समझते हैं:

1. कम चीनी वाले पेय (Less than 5g per 100ml): स्वस्थ विकल्प, कोई टैक्स नहीं!
परिभाषा: जिन पेय पदार्थों में प्रति 100 मिलीलीटर में 5 ग्राम से कम चीनी होती है, उन्हें इस श्रेणी में रखा गया है।

टैक्स: इन पर कोई उत्पाद शुल्क नहीं लगेगा (Exempt)।

उदाहरण: बिना चीनी मिलाए पानी, कुछ डाइट सोडा, बिना चीनी वाली कॉफी/चाय, और विशेष रूप से तैयार किए गए कम चीनी वाले जूस या मिल्क शेक।

असर: यह श्रेणी उपभोक्ताओं को सबसे स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करती है, क्योंकि ये सबसे सस्ते होंगे। कंपनियों को भी अपने उत्पादों को इस श्रेणी में लाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

2. मध्यम चीनी वाले पेय (5g to less than 8g per 100ml): मध्यम टैक्स
परिभाषा: जिन पेय पदार्थों में प्रति 100 मिलीलीटर में 5 ग्राम से लेकर 8 ग्राम से कम चीनी होती है, वे इस श्रेणी में आते हैं।

टैक्स: इन पर Dh0.79 प्रति लीटर का उत्पाद शुल्क लगेगा।

उदाहरण: कुछ फलों के रस, फ्लेवर्ड वाटर, और ऐसे पेय पदार्थ जिनमें चीनी की मात्रा मध्यम स्तर पर रखी गई हो।

असर: यह स्लैब उन उत्पादों को लक्षित करता है जिनमें थोड़ी चीनी होती है लेकिन वे अत्यधिक मीठे नहीं होते। यह कंपनियों को चीनी की मात्रा को इस सीमा से नीचे रखने के लिए प्रेरित करेगा ताकि वे कम टैक्स वाले स्लैब में आ सकें।

3. अधिक चीनी वाले पेय (8g or more per 100ml): सबसे महंगा विकल्प
परिभाषा: जिन पेय पदार्थों में प्रति 100 मिलीलीटर में 8 ग्राम या उससे अधिक चीनी होती है, उन्हें इस श्रेणी में रखा गया है।

टैक्स: इन पर Dh1.09 प्रति लीटर का उत्पाद शुल्क लगेगा।

उदाहरण: अधिकांश कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स (कोका-कोला, पेप्सी आदि), एनर्जी ड्रिंक्स, कुछ मीठे फलों के रस और बच्चों के लिए बने अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ।

असर: यह श्रेणी उन उत्पादों को सबसे महंगा बनाती है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक हानिकारक माने जाते हैं। इसका सीधा उद्देश्य उपभोक्ताओं को इन उत्पादों से दूर रखना और उन्हें स्वस्थ विकल्पों की ओर धकेलना है।

एक स्वस्थ भविष्य की ओर एक मीठा कदम

UAE का नया शुगर टैक्स एक साहसिक और आवश्यक कदम है। यह नीति सिर्फ उत्पादों की कीमतों को बदलने से कहीं अधिक है; यह एक सांस्कृतिक बदलाव लाने की कोशिश कर रही है जहाँ स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम क्या खा रहे हैं और क्या पी रहे हैं।

यह बदलाव क्यों ज़रूरी था? UAE की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ
यह टैक्स सिर्फ राजस्व बढ़ाने के बारे में नहीं है; यह UAE में बढ़ती स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक रणनीतिक प्रतिक्रिया है।

बढ़ता मोटापा (Obesity): UAE में मोटापे की दर चिंताजनक रूप से बढ़ रही है, खासकर बच्चों और युवाओं में। अत्यधिक चीनी का सेवन मोटापे का एक प्रमुख कारण है, जिससे हृदय रोग, स्ट्रोक और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

मधुमेह (Diabetes) का बढ़ता प्रकोप: UAE दुनिया के उन देशों में से एक है जहां मधुमेह की दर सबसे अधिक है। मीठे पेय पदार्थों का नियमित सेवन टाइप 2 मधुमेह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दंत स्वास्थ्य (Dental Health): चीनी युक्त पेय पदार्थ दांतों की सड़न और अन्य दंत समस्याओं का भी कारण बनते हैं।

स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा: सरकार का लक्ष्य एक स्वस्थ संस्कृति को बढ़ावा देना है जहाँ लोग अपने भोजन और पेय पदार्थों के विकल्पों के बारे में अधिक जागरूक हों। यह टैक्स एक नीतिगत उपकरण है जो इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।

उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?
यह नया टैक्स सीधे तौर पर आपकी खरीदारी की आदतों को प्रभावित करेगा:

कीमतों में बदलाव: आप देखेंगे कि कम चीनी वाले विकल्प अब काफी सस्ते हो जाएंगे, जबकि अत्यधिक मीठे ड्रिंक्स महंगे हो जाएंगे।

लेबल्स पढ़ने की आदत: अब आपको अपनी पसंदीदा ड्रिंक खरीदने से पहले उसके न्यूट्रिशन लेबल पर चीनी की मात्रा जांचने की आदत डालनी होगी। यह आपको सूचित निर्णय लेने में मदद करेगा।

स्वस्थ विकल्पों की ओर झुकाव: बढ़ती कीमतों के कारण, बहुत से लोग स्वाभाविक रूप से कम चीनी या बिना चीनी वाले पेय पदार्थों की ओर रुख करेंगे। यह धीरे-धीरे एक स्वस्थ आबादी का निर्माण करेगा।

बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान: माता-पिता अब बच्चों के लिए मीठे जूस खरीदने से पहले दो बार सोचेंगे, जिससे बच्चों में चीनी का सेवन कम होगा।

उद्योग पर क्या असर होगा?
यह बदलाव केवल उपभोक्ताओं के लिए नहीं है; इसका पेय उद्योग पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा:

उत्पाद पुनर्गठन: पेय कंपनियों को अपने उत्पादों के फॉर्मूले पर फिर से विचार करना होगा। कई कंपनियां अपने उत्पादों में चीनी की मात्रा को कम करने या वैकल्पिक स्वीटनर (जैसे स्टीविया) का उपयोग करने पर विचार करेंगी ताकि वे कम टैक्स वाले स्लैब में आ सकें।

नवाचार: हम बाजार में नए, कम चीनी वाले या जीरो-शुगर वाले उत्पादों की बढ़ती संख्या देख सकते हैं, क्योंकि कंपनियां उपभोक्ताओं की नई मांगों को पूरा करने की कोशिश करेंगी।

मार्केटिंग रणनीतियाँ: कंपनियां अपने उत्पादों को “कम चीनी,” “कोई अतिरिक्त चीनी नहीं,” या “स्वस्थ विकल्प” के रूप में मार्केटिंग करेंगी।

प्रतिस्पर्धा: चीनी की मात्रा के आधार पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे अंततः ग्राहकों को बेहतर और स्वस्थ विकल्प मिलेंगे।

वैश्विक संदर्भ: एक बढ़ता हुआ रुझान
UAE अकेला देश नहीं है जिसने इस तरह का “शुगर टैक्स” लागू किया है। दुनिया भर में कई देश, जैसे यूके, मेक्सिको, फ्रांस, आयरलैंड और सऊदी अरब, पहले ही इसी तरह के उपायों को अपना चुके हैं। इन देशों में शुरुआती अध्ययनों से पता चला है कि चीनी करों ने मीठे पेय पदार्थों की खपत को कम करने और स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देने में मदद की है। UAE का कदम इस वैश्विक रुझान के अनुरूप है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए एक सिद्ध रणनीति को अपना रहा है।

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