रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि: हाल ही में मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में गहराते संकट और अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बीच, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक फोन वार्ता हुई है। रूसी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस वार्ता की पुष्टि की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व एक अभूतपूर्व युद्ध की चपेट में है और वैश्विक कूटनीति, विशेषकर ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सदस्य देशों के बीच दृष्टिकोण को लेकर मतभेद उभर रहे हैं।

जयशंकर-लावरोव वार्ता: मुख्य बिंदु और आधिकारिक पुष्टि
रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. एस. जयशंकर और सर्गेई लावरोव के बीच यह फोन वार्ता 11 मार्च 2026 को संपन्न हुई। इस वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) की वर्तमान स्थिति और ईरान पर चल रहा संघर्ष था। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
वार्ता के प्रमुख अंश:
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स्थिति को सामान्य बनाने का आह्वान: दोनों नेताओं ने ईरान के आसपास उत्पन्न हुई युद्ध जैसी स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया और क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति बहाली (rapid normalisation) का आह्वान किया।
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ब्रिक्स और एससीओ की भूमिका: वार्ता के दौरान, दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) को स्थिति को शांत करने और सभी पक्षों के वैध हितों के संतुलन के आधार पर एक स्थायी शांति समझौता बनाने में अपना योगदान देना चाहिए।
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द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा: मध्य पूर्व के संकट के अलावा, दोनों नेताओं ने आगामी राजनीतिक संपर्कों और भारत-रूस द्विपक्षीय प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की। यह दर्शाता है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारत और रूस के संबंध मजबूत बने हुए हैं। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
Press release on Lavrov-Jaishankar phone conversatio
Russia Confirms Jaishankar-Lavrov Phone Call on BRICS Differences n (March 11, 2026)
India-Russia partnership remains strong: Russian envoy Babushkin
ब्रिक्स (BRICS) के भीतर उभरते मतभेद और आम सहमति का अभाव
इस पूरी कूटनीतिक वार्ता का सबसे दिलचस्प पहलू ब्रिक्स देशों के बीच उभरते मतभेद हैं। ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका, साथ ही नए सदस्य जैसे ईरान) पारंपरिक रूप से पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को चुनौती देने वाले एक मंच के रूप में देखा जाता है। लेकिन मध्य पूर्व के वर्तमान संकट ने इस गुट के भीतर की वैचारिक और कूटनीतिक दरारों को उजागर कर दिया है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
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दृष्टिकोण में भिन्नता: अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर ब्रिक्स के भीतर आम सहमति की कमी है। रूस और चीन खुलकर ईरान के समर्थन में खड़े हैं और अमेरिका तथा इज़राइल की कार्रवाइयों की कड़ी निंदा कर रहे हैं। दूसरी ओर, भारत एक संतुलित दृष्टिकोण अपना रहा है।
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भारत की चिंताएं: भारत ने इस गुट के भीतर ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर एकतरफा या अत्यधिक पश्चिम-विरोधी रुख अपनाने को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। भारत के अमेरिका और इज़राइल दोनों के साथ गहरे रणनीतिक संबंध हैं, और वह नहीं चाहता कि ब्रिक्स मंच का उपयोग किसी एक देश के भू-राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जाए। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
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मध्यस्थता का प्रयास: डॉ. जयशंकर की लावरोव से बातचीत भारत की उस सक्रिय कूटनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह ब्रिक्स के भीतर की इन खाइयों को पाटने और एक संतुलित, शांति-उन्मुख दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास कर रहा है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
मध्य पूर्व का वर्तमान संकट: ईरान युद्ध की भयावहता
इस वार्ता की पृष्ठभूमि वह विनाशकारी संघर्ष है जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े पैमाने के हमलों के बाद से यह संकट एक पूर्ण युद्ध में बदल गया है।
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हमले और जनहानि: अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडरों के मारे जाने की खबरें हैं। इसके बाद से ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
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ईरान की जवाबी कार्रवाई: तेहरान ने इज़राइल (विशेषकर तेल अवीव) और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ‘खुर्रमशहर’ (Khorramshahr) मिसाइलों और ड्रोन्स से बड़े पैमाने पर हमले किए हैं।
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नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान: इन हमलों के कारण खाड़ी देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और नागरिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। यह स्थिति भारत और रूस दोनों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि खाड़ी देश दोनों के रणनीतिक साझेदार हैं।
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वैश्विक व्यापार पर असर: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, में नौवहन पंगु हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा होने का खतरा बढ़ गया है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
भारत का भू-राजनीतिक रुख: कूटनीतिक संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता
भारत ने इस पूरे संकट के दौरान ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) का बेहतरीन उदाहरण पेश किया
है। भारत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति स्थापित करना, अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध रखना है।
भारत की प्राथमिकताओं को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
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हिंसा की निंदा और कूटनीति का आह्वान: भारत ने एक संतुलित बयान जारी करते हुए हिंसा की निंदा की है और सभी पक्षों से कूटनीति तथा संवाद के रास्ते पर लौटने की अपील की है। भारत ने इज़राइल या अमेरिका पर सीधे तौर पर निशाना साधने से परहेज किया है, जो रूस के रुख से बिल्कुल अलग है।
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ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (जैसे कुवैत, इराक, सऊदी अरब) से आयात करता है। संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित और मुफ्त नेविगेशन सुनिश्चित करना उसकी “सर्वोच्च प्राथमिकता” है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
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प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में लगभग 90 लाख (9 मिलियन) से अधिक भारतीय काम करते हैं और रहते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा भारत सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता है।
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पीएम मोदी की कूटनीतिक पहल: इस संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी देशों के नेताओं के साथ सीधे संपर्क साधा है। उन्होंने कुवैत के क्राउन प्रिंस और यूएई (UAE) के राष्ट्रपति से फोन पर बात की है। पीएम मोदी ने कुवैत की संप्रभुता पर हुए हमलों की निंदा की है और क्षेत्रीय शांति के लिए निरंतर कूटनीतिक जुड़ाव पर सहमति व्यक्त की है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
रूस की कूटनीति: ईरान का समर्थन और पश्चिमी देशों का कड़ा विरोध
इस संकट में रूस का रुख भारत की तुलना में बहुत अधिक मुखर और अमेरिका-विरोधी रहा है। मास्को ने ईरान पर हुए अमेरिकी और इज़राइली हमलों को “बिना उकसावे के किया गया सशस्त्र आक्रामकता” (unprovoked armed aggression) करार दिया है।
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अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाइयां मौलिक अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं और मध्य पूर्व को अराजकता के भंवर में धकेल रही हैं। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
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ईरान के साथ रणनीतिक साझेदारी: यूक्रेन युद्ध (2022) के बाद से रूस और ईरान के संबंध काफी गहरे हुए हैं। ईरान ने रूस को ‘शाहेद’ ड्रोन और अन्य सैन्य सहायता प्रदान की है। इसके बदले में, रूस कूटनीतिक मंचों पर ईरान का मजबूती से बचाव कर रहा है।
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सैन्य हस्तक्षेप से परहेज: हालांकि रूस ईरान का कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन कर रहा है, लेकिन उसने सीधे तौर पर अमेरिका या इज़राइल के खिलाफ इस युद्ध में सैन्य रूप से हस्तक्षेप करने से परहेज किया है। रूस इस संघर्ष का राजनीतिक-कूटनीतिक समाधान चाहता है ताकि वह अपने संसाधनों को यूक्रेन और अन्य प्राथमिकताओं पर केंद्रित रख सके। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर प्रभाव
यह संकट केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है; इसके वैश्विक आर्थिक परिणाम बहुत गहरे हैं, जिन पर भारत और रूस दोनों की नजर है।
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तेल की कीमतों में उछाल: होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% से अधिक कच्चा तेल गुजरता है। ईरान और अमेरिका की धमकियों (जैसे ईरान द्वारा तेल मार्ग बाधित करने की धमकी और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के मिसाइल उद्योग को नष्ट करने की चेतावनी) ने वैश्विक बाजारों में घबराहट पैदा कर दी है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
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आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: युद्ध के कारण कई शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से अपने जहाजों को हटा लिया है। हाल ही में, चीन जाने वाले रूसी तेल टैंकरों को सुरक्षा कारणों से अपना रास्ता बदलकर भारत की ओर मुड़ना पड़ा है, जो दिखाता है कि कैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रम व्यापार मार्गों को तुरंत बदल देते हैं।
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भारत में एलपीजी और ईंधन की स्थिति: युद्ध की आशंकाओं को देखते हुए भारत के कुछ हिस्सों (जैसे मिजोरम) में एलपीजी गैस सिलेंडरों और ईंधन की जमाखोरी तथा पैनिक बाइंग की खबरें भी आई हैं, हालांकि सरकार ने निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया है।
भारत और रूस: बहुध्रुवीय विश्व में एक परिपक्व साझेदारी
जयशंकर और लावरोव की यह फोन वार्ता यह साबित करती है कि भारत और रूस के संबंध इतने परिपक्व हैं कि वे असहमति वाले मुद्दों पर भी खुलकर बात कर सकते हैं।
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जहां रूस चाहता है कि ब्रिक्स मंच पश्चिमी देशों की आक्रामकता के खिलाफ एक मुखर आवाज बने, वहीं भारत चाहता है कि ब्रिक्स एक सकारात्मक और विकासोन्मुखी एजेंडे पर काम करे, न कि केवल एक ‘पश्चिम-विरोधी’ (Anti-West) ब्लॉक बनकर रह जाए। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
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भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि ईरान के साथ उसके अपने ऐतिहासिक संबंध बने रहें, जबकि वह अमेरिका और इज़राइल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी न खोए। दूसरी ओर, रूस भारत की इस स्थिति को समझता है, भले ही मध्य पूर्व में दोनों के हित पूरी तरह से मेल नहीं खाते हों।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और व्यापार घाटा
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। मध्य पूर्व में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है।
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कीमतों में वृद्धि: यदि संघर्ष बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं। अनुमान है कि कच्चे तेल में प्रति $10 की वृद्धि भारत के चालू खाता घाटे (CAD) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 0.5% तक बढ़ा सकती है।
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आयात बिल: भारत का व्यापार घाटा (निर्यात और आयात के बीच का अंतर) बढ़ जाएगा, क्योंकि तेल खरीदने के लिए अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी होगी।
2. मुद्रास्फीति (Inflation) और घरेलू कीमतें
LPG और रसोई गैस: जैसा कि हाल ही में देखा गया, युद्ध की आशंका से एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत या जमाखोरी की खबरें आने लगती हैं, जो आम आदमी के बजट को बिगाड़ती हैं। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
LPG और रसोई गैस: जैसा कि हाल ही में देखा गया, युद्ध की आशंका से एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत या जमाखोरी की खबरें आने लगती हैं, जो आम आदमी के बजट को बिगाड़ती हैं।
RBI की चुनौती: यदि मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल होगा, जिससे होम लोन और कार लोन की EMI महंगी बनी रह सकती है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का संकट
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। भारत के लिए यह रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि:
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भारत का अधिकांश तेल आयात और LNG (तरल प्राकृतिक गैस) इसी मार्ग से होकर आता है।
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यदि ईरान इस मार्ग को बाधित करता है, तो भारत को वैकल्पिक और महंगे मार्गों का सहारा लेना होगा, जिससे शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) में भारी वृद्धि होगी। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
रुपये की कमजोरी (Depreciation of Rupee)
रक्षा आपूर्ति और ‘मेक इन इंडिया’ पर असर
भारत के लिए इज़राइल दूसरा या तीसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। भारतीय सशस्त्र बल इज़राइली तकनीक पर काफी हद तक निर्भर हैं।
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सप्लाई चेन में देरी: इज़राइल वर्तमान में स्वयं एक बड़े युद्ध में लगा हुआ है। ऐसे में उसकी रक्षा कंपनियां (जैसे IAI, Rafael, Elbit) अपनी घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही हैं। इससे भारत को होने वाली बराक-8 मिसाइल प्रणाली, ड्रोन (Heron/Searcher) और रडार प्रणालियों की डिलीवरी में देरी हो सकती है।
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रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स: भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना द्वारा उपयोग किए जा रहे इज़राइली हथियारों के रखरखाव (Maintenance) और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जो परिचालन तत्परता के लिए चिंता का विषय है।
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सह-उत्पादन (Co-production): ‘मेक इन इंडिया’ के तहत कई इज़राइली कंपनियां भारतीय फर्मों के साथ मिलकर मिसाइल और छोटे हथियार बना रही हैं। युद्ध लंबा खिंचने पर इन संयुक्त उपक्रमों की गति धीमी हो सकती है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
2. द्विपक्षीय व्यापार और निवेश
भारत और इज़राइल के बीच गैर-रक्षा व्यापार भी काफी महत्वपूर्ण है, जो प्रति वर्ष लगभग $10-12 बिलियन का है।
द्विपक्षीय व्यापार और निवेश
भारत और इज़राइल के बीच गैर-रक्षा व्यापार भी काफी महत्वपूर्ण है, जो प्रति वर्ष लगभग $10-12 बिलियन का है।
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हीरा उद्योग (Diamond Industry): भारत और इज़राइल के बीच व्यापार का एक बड़ा हिस्सा कटे और पॉलिश किए गए हीरों का है। सूरत (गुजरात) का हीरा उद्योग इज़राइल के साथ गहरे व्यापारिक संबंधों से जुड़ा है। युद्ध के कारण इस क्षेत्र में मांग और आपूर्ति दोनों प्रभावित हो रही हैं।
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कृषि और जल तकनीक: इज़राइल भारत के कई राज्यों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) के माध्यम से ड्रिप सिंचाई और उन्नत कृषि तकनीक साझा करता है। इन परियोजनाओं के लिए इज़राइली विशेषज्ञों का भारत आना अब सुरक्षा कारणों से बाधित हो गया है।
आईटी (IT) और स्टार्टअप इकोसिस्टम
इज़राइल को ‘स्टार्टअप नेशन’ कहा जाता है और कई भारतीय आईटी कंपनियां (जैसे TCS, Infosys, Wipro) वहां सक्रिय हैं।
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इज़राइल में काम करने वाले कई टेक प्रोफेशनल्स को सेना में रिजर्व के तौर पर बुलाया गया है, जिससे वहां की परियोजनाओं का काम रुक गया है।
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भारतीय स्टार्टअप्स जो इज़राइली साइबर सुरक्षा या एआई तकनीक का उपयोग करते हैं, उन्हें अपनी तकनीकी सहायता (Technical Support) प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।
नागरिकों की सुरक्षा और निकासी योजना (Evacuation Plan)
खाड़ी क्षेत्र में लगभग 90 लाख (9 मिलियन) भारतीय रहते हैं, जिनमें से अकेले ईरान में ही 10,000 से अधिक छात्र, नाविक और पेशेवर शामिल हैं।
सेफ हाउस और रिलोकेशन: युद्ध क्षेत्र के पास रहने वाले भारतीय छात्रों और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है। अब तक लगभग 67,000 भारतीय सुरक्षित वापस आ चुके हैं।
LPG संकट का प्रबंधन: सरकार ने राज्यों को व्यावसायिक LPG का 10% अतिरिक्त कोटा देने का प्रस्ताव दिया है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके। साथ ही, पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
रणनीतिक भंडार (SPR) का उपयोग: भारत ने संकेत दिया है कि यदि आपूर्ति में वास्तविक बाधा आती है, तो वह विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में स्थित अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (जो करीब 9.5 दिनों का बैकअप देते हैं) का उपयोग कर सकता है।
सप्लाई चेन लचीलापन: यह समूह निर्यातकों और आयातकों के लिए सीमा शुल्क (Customs) प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बीमा प्रीमियम में अचानक होने वाली वृद्धि से निपटने के लिए वित्तीय संस्थानों के साथ काम कर रहा है। रूस ने की जयशंकर-लावरोव फोन वार्ता की पुष्टि
जी-20 और ब्रिक्स में प्रभाव: प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर लगातार खाड़ी देशों के नेताओं (जैसे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत) और वैश्विक शक्तियों (रूस, अमेरिका) के संपर्क में हैं ताकि युद्ध को और अधिक फैलने से रोका जा सके।