बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला: जांबाजपोरा में IED बरामद, 7 दिनों में दूसरी बड़ी साजिश नाकाम

श्रीनगर/बारामूला | 20 फरवरी 2026

बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला: जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा की राह में एक बार फिर बाधा डालने की कोशिश की गई, जिसे भारतीय सेना के सतर्क जवानों ने विफल कर दिया। बारामूला के जांबाजपोरा में शुक्रवार सुबह सुरक्षाबलों को एक संदिग्ध वस्तु मिली, जो बाद में एक भारी विस्फोटक (IED) निकली। सूत्रों के अनुसार, यह IED सेना के उस रास्ते पर लगाया गया था जहाँ से कुछ ही समय बाद सेना का एक बड़ा काफिला गुजरने वाला था।

बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला
बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

घटना का विवरण: कैसे टला हादसा?

आज सुबह नियमित गश्त और विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर 46 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने जांबाजपोरा क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। सड़क के किनारे एक संदिग्ध पैकेट को देखते ही जवानों ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत पूरे इलाके को सील कर दिया।

  • घेराबंदी: सुरक्षाबलों ने तुरंत यातायात रोक दिया और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया।

  • BDS की कार्रवाई: मौके पर बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) को बुलाया गया। विशेषज्ञों ने बड़ी सावधानी से IED को उसके स्थान से हटाया और एक सुरक्षित नियंत्रित विस्फोट के जरिए उसे निष्क्रिय (Defuse) कर दिया। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

  • लक्ष्य: सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकियों का मुख्य निशाना सेना का काफिला था, ताकि घाटी में दहशत का माहौल पैदा किया जा सके।

एक हफ्ते में दूसरी घटना: क्या है आतंकियों का नया पैटर्न?

यह चिंता का विषय है कि बारामूला जिले में महज एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बार है जब सुरक्षाबलों ने IED बरामद किया है।

  1. 18 फरवरी, 2026: इससे पहले बुधवार को ही श्रीनगर-बारामूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर नरबल (Narbal) और पट्टन (Pattan) के पास एक संदिग्ध ब्रीफकेस और ट्रॉली बैग मिला था, जिसमें IED छिपाया गया था। उसे भी समय रहते नष्ट कर दिया गया था।

  2. 20 फरवरी, 2026: आज जांबाजपोरा में भारी मात्रा में विस्फोटक मिला। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

विशेषज्ञों का विश्लेषण: सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार से बैठे आकाओं के इशारे पर आतंकी अब ‘लो-रिस्क, हाई-इम्पैक्ट’ वाली रणनीति अपना रहे हैं। सीधे टकराव के बजाय वे रिमोट कंट्रोल या टाइमर आधारित IED का उपयोग कर रहे हैं ताकि सुरक्षाबलों को नुकसान पहुँचाया जा सके और सुरक्षित भाग निकलें।

श्रीनगर-बारामूला NH पर IED मिला, आतंकी साजिश नाकाम

बारामूला में भारतीय सेना पर पुलवामा जैसे हमले की साजिश | IED Recovery

Srinagar-Baramulla Highway IED Recovery Visuals

घाटी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस घटना के बाद पूरे उत्तर कश्मीर, विशेषकर बारामूला और सोपोर के इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

  • ड्रोन निगरानी: संवेदनशील इलाकों में ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

  • सर्च ऑपरेशन: जांबाजपोरा और आसपास के गांवों में सेना, पुलिस और CRPF का संयुक्त तलाशी अभियान जारी है ताकि इस साजिश के पीछे शामिल आतंकियों या उनके मददगारों (OGW) का पता लगाया जा सके।

  • पर्यटन पर प्रभाव: हाल ही में जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2025 के हमलों के बाद कई पर्यटन स्थलों को फिर से खोला है। ऐसे में सुरक्षाबल यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आतंकियों की इन कायराना हरकतों का असर आम जनजीवन और पर्यटन पर न पड़े।

  • 1. घटना का घटनाक्रम (Timeline of Events)

    शुक्रवार की अलसुबह, जब पूरी घाटी बर्फबारी और ठंड की आगोश में थी, सेना की 46 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) के रोड ओपनिंग पार्टी (ROP) के जवान अपने नियमित काम पर निकले थे। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

    • सुबह 05:30 बजे: जांबाजपोरा-हाजीबल मार्ग पर गश्त के दौरान एक संदिग्ध प्लास्टिक कंटेनर सड़क के किनारे मिट्टी में दबा हुआ मिला।

    • सुबह 06:15 बजे: इलाके की 500 मीटर की परिधि को पूरी तरह सील कर दिया गया। नागरिकों की आवाजाही रोक दी गई।

    • सुबह 07:45 बजे: सेना के बम निरोधक दस्ते (BDS) और खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की टीम मौके पर पहुँची।

    • सुबह 09:00 बजे: IED को एक सुरक्षित गड्ढे में ले जाकर नियंत्रित विस्फोट (Controlled Explosion) के जरिए नष्ट कर दिया गया।

    2. एक हफ्ते में दो बार: क्या यह किसी बड़ी साजिश की आहट है?

    जैसा कि आपने उल्लेख किया, यह एक हफ्ते में दूसरी घटना है। इससे पहले पट्टन-हाइवे पर भी इसी तरह की कोशिश की गई थी। इन घटनाओं में कुछ समानताएं देखी गई हैं:

    विशेषता विवरण
    निशाना सेना के रसद और जवानों को ले जाने वाले काफिले (Convoy)।
    समय सुबह का वक्त, जब कोहरे के कारण दृश्यता (Visibility) कम होती है।
    तकनीक कम वजन वाले लेकिन उच्च तीव्रता के विस्फोटक, जिन्हें आसानी से छिपाया जा सके।
    लोकेशन मुख्य राजमार्गों से जुड़ने वाली संपर्क सड़कें (Link Roads)।

    3. सुरक्षाबलों की नई रणनीति

    आतंकियों के इस बदलते पैटर्न को देखते हुए भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अपनी रणनीति में ‘प्रो-एक्टिव’ बदलाव किए हैं:

    • तकनीकी निगरानी: अब केवल मानवीय गश्त पर निर्भर न रहकर, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों वाले ड्रोन्स का उपयोग किया जा रहा है जो रात में भी थर्मल इमेजिंग के जरिए जमीन के नीचे की हलचल पकड़ सकते हैं। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

    • स्थानीय इनपुट: “इंसानी खुफिया तंत्र” (HumInt) को मजबूत किया गया है। स्थानीय लोगों से मिली छोटी सी जानकारी भी बड़े हादसों को टालने में मदद कर रही है। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

    • काफिले की सुरक्षा: अब सेना के काफिले के गुजरने से पहले रोड ओपनिंग पार्टियाँ (ROP) इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स का इस्तेमाल करती हैं, जिससे रिमोट से चलने वाले IED काम नहीं कर पाते। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

    4. स्थानीय प्रभाव और नागरिकों की सुरक्षा

    बारामूला में बार-बार मिल रहे विस्फोटकों का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ता है। सुरक्षाबलों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शांति भंग न हो। पुलिस ने स्थानीय निवासियों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है और अपील की है कि किसी भी लावारिस बैग या डिब्बे को हाथ न लगाएं। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

    5. विश्लेषण: क्यों बारामूला ही?

    बारामूला रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ से नियंत्रण रेखा (LoC) पास है और यह श्रीनगर को उरी और गुलमर्ग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जोड़ता है। आतंकियों का मकसद इस लाइफलाइन को बाधित करना है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाए कि घाटी अभी भी अस्थिर है

    1. सुरक्षा का कवच: राष्ट्रीय राइफल्स (RR) और विशिष्ट यूनिट्स

    कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी (आतंकवाद विरोधी अभियानों) के लिए भारतीय सेना की सबसे घातक और प्रभावी विंग राष्ट्रीय राइफल्स है।

    46 राष्ट्रीय राइफल्स (46 RR)

    जांबाजपोरा की घटना में जिस यूनिट ने IED बरामद किया, वह 46 RR है।

    • मुख्यालय: इनका बेस बारामूला के पुराने शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों की सुरक्षा के लिए जाना जाता है।

    • विशेषज्ञता: इस यूनिट के पास “ह्यूमन इंटेलिजेंस” (HumInt) का बहुत मजबूत नेटवर्क है। स्थानीय निवासियों के साथ इनके संबंध इतने गहरे हैं कि संदिग्ध गतिविधियों की सूचना इन्हें मिनटों में मिल जाती है। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

    स्पेशल फोर्सेज (Para SF)

    जब कभी किसी आतंकी के छिपे होने की सटीक जानकारी मिलती है, तो RR के साथ 9 Para (SF) या 4 Para (SF) को बुलाया जाता है। ये “सर्जिकल स्ट्राइक” के विशेषज्ञ होते हैं और घने जंगलों या शहरी इलाकों में सटीक निशाना साधने में माहिर होते हैं।

    2. दुश्मन का चेहरा: सक्रिय आतंकी संगठन और उनकी चाल

    बारामूला और सोपोर के इलाकों में मुख्य रूप से तीन संगठन सक्रिय रहने की कोशिश करते हैं:

    संगठन का नाम कार्यप्रणाली (Modus Operandi) वर्तमान स्थिति
    लश्कर-ए-तैयबा (LeT/TRF) ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ के नाम से सक्रिय। ये ज्यादातर IED और ‘हिट एंड रन’ हमलों का सहारा लेते हैं। इनके पास स्थानीय भर्ती कम हुई है, इसलिए ये विदेशी आतंकियों पर निर्भर हैं।
    जैश-ए-मोहम्मद (JeM) आत्मघाती हमलों और बड़े IED धमाकों (जैसे पुलवामा) के लिए कुख्यात। वर्तमान में इनके पास संसाधनों की कमी है, इसलिए ये छोटे स्टिकी बम (Sticky Bombs) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
    हिजबुल मुजाहिद्दीन (HM) स्थानीय युवाओं को बरगलाकर घुसपैठ और रसद (Logistics) में मदद लेना। इनका नेटवर्क अब काफी हद तक ध्वस्त हो चुका है।

    3. IED का इतिहास और खतरा

    बारामूला में पिछले कुछ वर्षों में IED का इस्तेमाल फिर से बढ़ा है। इसके पीछे के मुख्य कारण हैं:

    • सीधा टकराव टालना: आमने-सामने की मुठभेड़ में सुरक्षाबल आतंकियों को टिकने नहीं देते, इसलिए आतंकी दूर से धमाका करने की तकनीक (IED) अपनाते हैं।

    • स्टिकी बम (Sticky Bombs): ये चुंबकीय बम होते हैं जिन्हें वाहनों पर चिपका दिया जाता है। पिछले साल बारामूला हाईवे पर ऐसे कई बम निष्क्रिय किए गए थे।

    • परफ्यूम IED: हाल ही में जम्मू और कश्मीर में ‘परफ्यूम बोतल’ के रूप में विस्फोटक मिले थे, जो छूने पर फट जाते हैं। यह आतंकियों की हताशा को दर्शाता है कि वे आम नागरिकों को भी निशाना बनाने से नहीं हिचक रहे। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

    4. ओजीडब्ल्यू (OGW) नेटवर्क: पर्दे के पीछे के गुनहगार

    “ओवर ग्राउंड वर्कर्स” (OGW) वे लोग होते हैं जो आम नागरिकों की तरह रहते हैं लेकिन आतंकियों को:

    1. रहने की जगह (Safe House) देते हैं।

    2. सुरक्षाबलों की आवाजाही की रेकी (Recce) करते हैं।

    3. विस्फोटक और हथियार एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाते हैं। बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

    जांबाजपोरा घटना में भी पुलिस को शक है कि किसी स्थानीय OGW ने ही रात के अंधेरे में IED प्लांट किया था। फिलहाल, सेना संदिग्ध मोबाइल टावर डेटा और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

    आगे क्या?

    बारामूला की सुरक्षा अब ‘त्रिस्तरीय’ (Three-tier) कर दी गई है:

    1. पहली परत: स्थानीय पुलिस की नाकाबंदी।

    2. दूसरी परत: CRPF द्वारा हाईवे सुरक्षा।

    3. तीसरी परत: सेना (RR) द्वारा ग्रामीण और जंगली इलाकों में ‘डोमिनेशन’ (वर्चस्व) बारामूला में टला बड़ा आतंकी हमला

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