पश्चिम एशिया संकट: में लगातार गहराते भू-राजनीतिक और सैन्य संकट के बीच, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 10 मार्च 2026 को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ एक ‘विस्तृत’ टेलीफोनिक बातचीत की। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस ताज़ा संघर्ष के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बातचीत है। इस वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराता खतरा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा था।

डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस बातचीत की पुष्टि करते हुए लिखा: “आज शाम ईरान के विदेश मंत्री @araghchi के साथ चल रहे संघर्ष के संबंध में नवीनतम घटनाक्रमों पर एक विस्तृत बातचीत हुई। हम संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं।” इस कूटनीतिक कदम को भारत द्वारा अपनी ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। नीचे इस पूरे घटनाक्रम, इसके कारणों और भारत पर इसके बहुआयामी प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है। पश्चिम एशिया संकट
संकट की पृष्ठभूमि और 28 फरवरी का घटनाक्रम
वर्तमान पश्चिम एशिया संकट ने 28 फरवरी 2026 को एक अत्यंत गंभीर मोड़ ले लिया था।
-
संयुक्त सैन्य हमला: अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर एक बड़ा संयुक्त सैन्य हवाई हमला किया।
-
सर्वोच्च नेता की मृत्यु: इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं की मृत्यु हो गई, जिसने पूरे मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध की आग भड़का दी।
-
नए नेतृत्व का उदय: इस घटना के कुछ ही दिनों बाद, ईरान ने मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) नियुक्त किया। नए नेतृत्व के तहत ईरान ने कई अरब देशों और इज़राइली ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं।
डॉ. जयशंकर और अराघची के बीच 10 मार्च की यह वार्ता मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद दोनों देशों के बीच पहला उच्च स्तरीय संपर्क था। इससे पहले दोनों नेताओं ने 28 फरवरी (हमले के तुरंत बाद) और 5 मार्च को भी बातचीत की थी।
India’s Jaishankar Speaks With Iran FM Seyed Abbas Araghchi Again
West Asia conflict: Jaishankar holds ‘detailed’ conversation with Iranian counterpart Araghchi
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और वैश्विक ऊर्जा संकट
इस युद्ध का सबसे बड़ा और तत्काल प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाज़ार पर पड़ा है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को प्रभावी ढंग से अवरुद्ध कर दिया है। पश्चिम एशिया संकट
-
वैश्विक व्यापार का चोकपॉइंट: होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा जलमार्ग है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल (Oil) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
-
कीमतों में उछाल: इस नाकेबंदी के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके साथ ही, कतर (जो दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में से एक है) ने भी अपने ठिकानों पर हमलों के बाद उत्पादन रोक दिया है। पश्चिम एशिया संकट
-
भारत के लिए चिंता: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है, जो अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85% आयात करता है। ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में कोई भी बड़ी बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। डॉ. जयशंकर ने वार्ता के दौरान इस विषय पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की।
- EAM S Jaishankar speaks to Iranian counterpart Araghchi amid concerns over West Asia conflict
Ministry of External Affairs (MEA) – Suo Motu Statement (9 March 2026): The Situation in West Asia – Rajya Sabha
आईआरआईएस देना (IRIS Dena) युद्धपोत की घटना
इस संघर्ष में समुद्री सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन गई है। 4 मार्च 2026 को श्रीलंका के तट से लगभग 20 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो के माध्यम से ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना (IRIS Dena) को डुबो दिया। पश्चिम एशिया संकट
-
भारतीय नौसेना की भूमिका: इस घटना के बाद, भारतीय नौसेना ने श्रीलंका के नेतृत्व में चलाए गए खोज और बचाव अभियान में सहायता के लिए अपने पोत आईएनएस तरंगिनी (INS Tarangini) और आईएनएस इक्षक (INS Ikshak) के साथ-साथ समुद्री गश्ती विमानों को तैनात किया।
-
हताहतों की संख्या: इस युद्धपोत पर लगभग 180 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें से 87 नाविकों की मृत्यु हो गई और लगभग 32 बचे लोगों को श्रीलंकाई नौसेना द्वारा बचाया गया। पश्चिम एशिया संकट
-
ईरान की प्रतिक्रिया: ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस हमले को ‘युद्ध अपराध’ करार दिया है और कहा है कि अमेरिका ने जानबूझकर बचाव कार्यों में बाधा डाली।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद, ईरान ने भारत से अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी, जिसे भारत ने 1 मार्च को मंजूरी दे दी थी।
भारत का आधिकारिक रुख और कूटनीतिक सिद्धांत
संसद में अपने हालिया संबोधन (9 मार्च 2026) में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया के प्रति भारत के दृष्टिकोण और तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया: पश्चिम एशिया संकट
-
संवाद और कूटनीति (Dialogue and Diplomacy): भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। भारत का दृढ़ विश्वास है कि विवादों का समाधान केवल बातचीत के माध्यम से ही हो सकता है और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। पश्चिम एशिया संकट
-
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा (Safety of Diaspora): खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ (10 मिलियन) भारतीय नागरिक रहते हैं और काम करते हैं। भारत सरकार के लिए उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं।
-
ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा (Energy and Trade Security): भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारू रखना भारत की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा है। पश्चिम एशिया संकट
अन्य वैश्विक नेताओं के साथ भारत का संवाद
इस संकट के बहुआयामी प्रभावों को देखते हुए, भारत केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य प्रमुख देशों के साथ भी सक्रिय कूटनीतिक संपर्क में है। 10 मार्च को ही डॉ. जयशंकर ने दो अन्य महत्वपूर्ण नेताओं से बात की पश्चिम एशिया संकट
ऊर्जा आयात और तेल की कीमतों का झटका
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिसमें से आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।
-
आयात बिल में वृद्धि: आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल $1 की वृद्धि भारत के वार्षिक आयात बिल में लगभग $2 बिलियन का इजाफा करती है। मार्च 2026 तक कच्चा तेल $89-$115 प्रति बैरल के बीच झूल रहा है, जिससे भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया संकट
-
होर्मुज की नाकेबंदी: भारत का लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। इसकी नाकेबंदी के कारण रिफाइनरियों को अब रूस, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो न केवल महंगे हैं बल्कि वहाँ से शिपमेंट पहुँचने में 25 से 45 दिन का समय लगता है। पश्चिम एशिया संकट
कृषि और खाद्य निर्यात पर संकट
भारत के लिए पश्चिम एशिया एक प्रमुख निर्यात बाजार है, विशेष रूप से कृषि उत्पादों के लिए।
-
चावल निर्यात: भारत प्रतिवर्ष लगभग $11.8 बिलियन का कृषि उत्पाद पश्चिम एशिया को निर्यात करता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा चावल (Rice) का है। वर्तमान में लगभग 4 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल बंदरगाहों या पारगमन (transit) में फंसा हुआ है।
-
क्षेत्रीय निर्भरता: भारत के मांस, केले, मसालों और डेयरी उत्पादों का 70% से अधिक निर्यात अकेले खाड़ी देशों (GCC) को जाता है। व्यापार में व्यवधान के कारण पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया संकट
लॉजिस्टिक्स और शिपिंग लागत में भारी उछाल
युद्ध के कारण समुद्री रास्तों का जोखिम बढ़ गया है, जिसका सीधा असर व्यापार की लागत पर पड़ा है।
-
फ्रेट और इंश्योरेंस: ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस’ (War-risk insurance) प्रीमियम कई गुना बढ़ गया है। कंटेनर फ्रेट दरों में 40% तक की वृद्धि देखी गई है।
-
हवाई माल ढुलाई: समुद्री मार्ग असुरक्षित होने के कारण कई निर्यातक हवाई मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, कोलकाता से मध्य पूर्व के लिए हवाई माल ढुलाई की दरें ₹190/किग्रा से बढ़कर ₹430/किग्रा तक पहुँच गई हैं। पश्चिम एशिया संकट
-
समय का नुकसान: जहाजों को अब अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते घूमकर जाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा के समय में 15 से 20 दिन की देरी हो रही है। पश्चिम एशिया संकट
औद्योगिक कच्चे माल की कमी
भारत अपनी कई औद्योगिक गतिविधियों के लिए खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर है:
-
उर्वरक (Fertilizers): भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया से $3.7 बिलियन का उर्वरक आयात किया था। आपूर्ति में कमी से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और सरकारी सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है। पश्चिम एशिया संकट
-
हीरा उद्योग: सूरत का हीरा उद्योग कच्चे हीरों के लिए 40% तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। शिपमेंट में देरी से उत्पादन और रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है।
मैक्रो-इकोनॉमिक प्रभाव (GDP और मुद्रास्फीति)
-
GDP वृद्धि: एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की रिपोर्ट के अनुसार, यदि संकट लंबा खींचता है, तो वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी विकास दर घटकर 6% तक रह सकती है (जो पहले 7% अनुमानित थी)।
-
रुपये की गिरावट: तेल के बढ़ते बिल और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले 91–93 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। पश्चिम एशिया संकट
सरकार के रक्षात्मक कदम
इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई आपातकालीन कदम उठाए हैं:
-
पोर्ट शुल्क में छूट: जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) ने पश्चिम एशिया जाने वाले फंसे हुए कंटेनरों के लिए ‘ग्राउंड रेंट’ में 100% की छूट दी है।
-
छोटे जहाजों का संचालन: बड़े टैंकरों के जोखिम को देखते हुए, 15 अप्रैल 2026 से खाड़ी देशों के लिए छोटे जहाजों (NVOCCs) की संख्या बढ़ाई जा रही है।
-
स्ट्रेटेजिक रिजर्व: भारत अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) का उपयोग कर रहा है, जो वर्तमान में लगभग 74 दिनों की खपत को कवर कर सकता है।
यह संकट भारत को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ऊर्जा विविधीकरण (जैसे हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा) की दिशा में तेजी से बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
