भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी 2026 को लगभग दो दशकों के इंतजार के बाद एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर अपनी वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न कर ली है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आक्रामक टैरिफ नीतियों ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।India-EU FTA Trade Deal
भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक व्यापारिक समझौता
27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
प्रमुख फोकस कीवर्ड्स और उनके प्रभाव
Duty-फ्री एक्सेस (Duty-free Access): भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में बिना किसी सीमा शुल्क के प्रवेश मिलेगा।
टैरिफ लिबरलाइजेशन (Tariff Liberalization): लग्जरी कारों और वाइन पर आयात शुल्क में भारी कटौती।
प्रोफेशनल मोबिलिटी (Professional Mobility): भारतीय आईटी और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के लिए आसान वीजा नियम।India-EU FTA Trade Deal
सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन (Supply Chain Diversification): चीन पर निर्भरता कम करने के लिए “फ्रेंड-शोरिंग” को बढ़ावा।
सभी सौदों की जननी" (Mother of All Deals)
दशकों की बातचीत और कई दौर की चर्चाओं के बाद, भारत और यूरोपीय संघ ने आखिरकार एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगा दी है। इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह न केवल व्यापार बल्कि निवेश और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।India-EU FTA Trade Deal
इस समझौते से दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाएं लगभग खत्म हो जाएंगी। भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और यूरोप के उच्च-तकनीकी उत्पादों को इससे सबसे अधिक लाभ होगा।
भारतीय निर्यातकों के लिए फायदे
- टेक्सटाइल और लेदर: भारतीय कपड़ा, जूते और चमड़ा उत्पादों पर अब यूरोपीय संघ में जीरो ड्यूटी लगेगी, जिससे बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को मजबूती मिलेगी।
- मछली पालन और कृषि: समुद्री उत्पाद (Marine products), फल और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे खुल जाएंगे।
- आईटी और सेवा क्षेत्र: 144 से अधिक सर्विस सब-सेक्टर्स (जैसे आईटी, हेल्थकेयर और शिक्षा) में भारतीय पेशेवरों को आसान प्रवेश और वीज़ा सुविधाएं मिलेंगी।
यूरोपीय निर्यातकों के लिए फायदे
- सस्ती यूरोपीय कारें: यूरोपीय कारों पर लगने वाला 110% टैरिफ धीरे-धीरे घटकर 10% तक आ जाएगा (सालाना 2.5 लाख कारों के कोटे के तहत)।
- वाइन और स्पिरिट: प्रीमियम यूरोपीय वाइन और व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 20% तक लाया जाएगा।
मशीनरी और रसायन: फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और रसायनों पर टैरिफ लगभग समाप्त कर दिए जाएंगे।India-EU FTA Trade Deal
क्या कारें वास्तव में 50% तक सस्ती होंगी?
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स में 70% (110% से 40% पर आना) की कटौती से कारों की ऑन-रोड कीमत में 30% से 50% तक की कमी आ सकती है।
उदाहरण: यदि कोई कार भारत में टैक्स के कारण 2 करोड़ रुपये की पड़ती थी, तो नए नियमों के बाद उसकी कीमत 1.2 करोड़ से 1.4 करोड़ रुपये के बीच आ सकती है। हालांकि, मुद्रा विनिमय दर (Currency exchange rate) और स्थानीय डीलर मार्जिन भी अंतिम कीमत तय करने में भूमिका निभाएंगे।
घरेलू कंपनियों पर प्रभाव (Tata और Mahindra)
भारतीय दिग्गज जैसे Tata Motors और Mahindra को सुरक्षा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों पर फिलहाल टैक्स नहीं घटाया गया है। चूंकि लग्जरी कार बाजार भारत के कुल कार बाजार का केवल 1% है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मारुति या टाटा जैसी मास-मार्केट कंपनियों की बिक्री पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
क्या आप चाहते हैं कि मैं इस समझौते के तहत आने वाले विशिष्ट कार मॉडल्स की संभावित नई कीमतों की सूची तैयार करूँ?
India-EU FTA trade deal details यह वीडियो भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते के बारे में गहराई से जानकारी देता है और समझाता है कि लग्जरी कारों की कीमतों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
लग्जरी कारों और वाइन पर टैरिफ लिबरलाइजेशन
India-EU FTA Trade Deal के तहत भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी खबर लग्जरी कारों की कीमतों में गिरावट है:
टैरिफ में कटौती: कारों पर लगने वाला 110% आयात शुल्क घटकर धीरे-धीरे 10% तक आ जाएगा।
कीमतों पर असर: 2 करोड़ रुपये की कार अब लगभग 1.2 करोड़ रुपये में मिल सकती है।
वाइन और स्पिरिट: प्रीमियम व्हिस्की और वाइन पर शुल्क 150% से घटकर मात्र 20% रह जाएगा।
टैक्स में भारी कटौती: 110% से सीधे 40% तक
अब तक भारत में पूरी तरह से निर्मित (CBU) कारों पर भारी आयात शुल्क (Import Duty) लगता था। इस समझौते के तहत इसे काफी कम कर दिया गया है।
मौजूदा टैक्स: वर्तमान में $40,000$ से अधिक कीमत वाली विदेशी कारों पर 110% तक टैक्स वसूला जाता है।
नई कटौती: FTA के तहत इस टैक्स को घटाकर 40% करने का प्रस्ताव है।
भविष्य का लक्ष्य: रिपोर्टों के अनुसार, आने वाले कुछ वर्षों में इस टैक्स को चरणबद्ध तरीके से घटाकर मात्र 10% तक लाया जा सकता है।
2.कौन सी कारें होंगी सस्ती?
यह छूट मुख्य रूप से उन कारों पर लागू होगी जो सीधे यूरोप से आयात की जाती हैं।
प्रमुख ब्रांड और मॉडल
Mercedes-Benz: S-Class, GLS और Maybach जैसे प्रीमियम मॉडल।
BMW: 7 Series, X7 और M-Series की स्पोर्ट्स कारें।
Audi: A8 L, Q8 और RS मॉडल।
अन्य लग्जरी ब्रांड: पोर्श (Porsche), लेम्बोर्गिनी (Lamborghini) और फेरारी (Ferrari) जैसे ब्रांड्स की कीमतों में भी कमी आएगी।
समझौते के प्रमुख विवरण और लाभ
इस समझौते से दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाएं लगभग खत्म हो जाएंगी। भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और यूरोप के उच्च-तकनीकी उत्पादों को इससे सबसे अधिक लाभ होगा।India-EU FTA Trade Deal
भारतीय निर्यातकों के लिए फायदे
टेक्सटाइल और लेदर: भारतीय कपड़ा, जूते और चमड़ा उत्पादों पर अब यूरोपीय संघ में जीरो ड्यूटी लगेगी, जिससे बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को मजबूती मिलेगी।
मछली पालन और कृषि: समुद्री उत्पाद (Marine products), फल और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे खुल जाएंगे।
आईटी और सेवा क्षेत्र: 144 से अधिक सर्विस सब-सेक्टर्स (जैसे आईटी, हेल्थकेयर और शिक्षा) में भारतीय पेशेवरों को आसान प्रवेश और वीज़ा सुविधाएं मिलेंगी।
यूरोपीय निर्यातकों के लिए फायदे
सस्ती यूरोपीय कारें: यूरोपीय कारों पर लगने वाला 110% टैरिफ धीरे-धीरे घटकर 10% तक आ जाएगा (सालाना 2.5 लाख कारों के कोटे के तहत)।
वाइन और स्पिरिट: प्रीमियम यूरोपीय वाइन और व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 20% तक लाया जाएगा।
मशीनरी और रसायन: फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और रसायनों पर टैरिफ लगभग समाप्त कर दिए जाएंगे।
कारों और वाइन तक आसान पहुँच: भारत यूरोपीय कारों और वाइन पर आयात शुल्क कम करने पर सहमत हुआ है, जिससे ये चीजें भारतीय बाजार में सस्ती हो सकती हैं।India-EU FTA Trade Deal
निर्यात में भारी उछाल: भारत के लिए, यह कपड़ा, चमड़ा और कृषि जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करेगा।
सेवा क्षेत्र को लाभ: भारतीय पेशेवरों (आईटी और स्वास्थ्य सेवा) के लिए यूरोप में काम करना और सेवाएँ देना आसान हो जाएगा।
निवेश में वृद्धि: यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करना अधिक आकर्षक होगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।India-EU FTA Trade Deal
यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
आर्थिक मजबूती: ईयू भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है। यह सौदा भारत को अपनी जीडीपी विकास दर बढ़ाने में मदद करेगा।
चीन पर निर्भरता कम करना: यह समझौता भारत और यूरोप दोनों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में विविधता लाने में मदद करता है।India-EU FTA Trade Deal
रोजगार के अवसर: निर्यात बढ़ने से भारत में लाखों नए रोजगार पैदा होने की संभावना है।
सुरक्षा, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण समझौते
व्यापार के अलावा, दोनों पक्षों ने कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है:India-EU FTA Trade Deal
| क्षेत्र | समझौते का विवरण |
| सुरक्षा और रक्षा | रक्षा उत्पादन में संयुक्त उद्यम और सूचना साझा करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर। |
| ग्रीन एनर्जी | हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन। |
| माइग्रेशन (Mobility) | छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल कामगारों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए एक व्यापक ढांचा। |
| आपदा प्रबंधन | प्राकृतिक आपदाओं के समय तकनीकी सहयोग और त्वरित सहायता। |
कोटे की सीमा और पात्रता (Eligibility)
| विवरण | सीमा / शर्त |
| न्यूनतम कीमत | यह छूट केवल उन कारों पर मिलेगी जिनकी आयात कीमत 15,000 यूरो (लगभग 14-16 लाख रुपये) से अधिक है। |
| वार्षिक कोटा | रियायती दरों पर हर साल लगभग 2,00,000 से 2,50,000 कारों के आयात की अनुमति दी जाएगी। |
| इंजन का प्रकार | फिलहाल यह छूट केवल ICE (पेट्रोल/डीजल) इंजनों के लिए है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अगले 5 सालों तक इससे बाहर रखा गया है। |
भविष्य की राह और निष्कर्ष
यह समझौता केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा का एक नया अध्याय है। इससे भारत की GDP में अगले 5 वर्षों में 1-1.5% की अतिरिक्त वृद्धि होने का अनुमान है।
हालांकि यह समझौता संपन्न हो गया है, लेकिन इसे पूरी तरह लागू होने (Ratification) में लगभग 12 से 18 महीने का समय लग सकता है।India-EU FTA Trade Deal
यह समझौता भविष्य का द्वार है। इससे भारत में उच्च-मूल्य वाली नौकरियां पैदा होंगी और वैश्विक स्तर पर हमारी स्थिति मजबूत होगी।” — पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री
