सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रम्प की प्रतिक्रिया
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ अवैध थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करके इस तरह के व्यापक कर लगाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि टैरिफ तय करने की शक्ति मुख्य रूप से अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है।
इस फैसले के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने जजों को “विदेशी हितों से प्रभावित” और “कमजोर” बताया। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और तुरंत Section 122 (Trade Act of 1974) का उपयोग करते हुए सभी देशों पर 10% का नया ग्लोबल बेसलाइन टैरिफ लगाने का कार्यकारी आदेश जारी कर दिया।

भारत के साथ व्यापार पर ट्रम्प का रुख: “Nothing Changes” ट्रम्प का नया ट्रेड ऑर्डर 2026
अदालती झटके के बावजूद, ट्रम्प ने भारत के संदर्भ में एक बहुत ही स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा:
“भारत के साथ हमारे व्यापार समझौते में कुछ भी नहीं बदला है। वे (भारत) टैरिफ का भुगतान करना जारी रखेंगे, और हम (अमेरिका) कोई टैरिफ नहीं देंगे। हमने एक ‘फ्लिप’ (बदलाव) किया है—पहले वे हमें लूट रहे थे, अब सौदा निष्पक्ष है।”
प्रमुख बिंदु जो ट्रम्प ने भारत के बारे में कहे:
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मोदी के साथ संबंध: ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक “शानदार इंसान” और “बहुत चतुर नेता” बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मोदी अपने देश के हितों के लिए अमेरिकी नेताओं से बेहतर सौदेबाजी करते रहे हैं।
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टैरिफ की दर: भारत के लिए प्रभावी टैरिफ दर 18% पर बनी रहेगी। फरवरी 2026 की शुरुआत में हुए समझौते के तहत, अमेरिका ने भारत पर लगे 25% के दंडात्मक टैरिफ (जो रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए थे) को हटाकर 18% कर दिया था। ट्रम्प ने पुष्टि की कि कोर्ट के फैसले के बाद भी यह 18% की दर लागू रहेगी। ट्रम्प का नया ट्रेड ऑर्डर 2026
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पारस्परिकता (Reciprocity): ट्रम्प ने दोहराया कि उनका मुख्य उद्देश्य ‘पारस्परिक व्यापार’ है। उन्होंने गर्व से कहा कि अब अमेरिका, भारतीय सामानों पर कर वसूल रहा है, जबकि अमेरिकी सामान भारत में कम या शून्य कर के साथ प्रवेश कर रहे हैं।
भारत के लिए इस स्थिति का क्या मतलब है?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने तकनीकी रूप से ट्रम्प के उन टैरिफ को रद्द कर दिया है जो ‘आपातकालीन शक्तियों’ के तहत लगाए गए थे। लेकिन भारत के लिए स्थिति अलग है क्योंकि भारत और अमेरिका पहले ही एक द्विपक्षीय अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
| पहलू | स्थिति |
| वर्तमान टैरिफ दर | 18% (भारतीय निर्यात पर) |
| रूसी तेल का मुद्दा | भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। |
| अमेरिकी लाभ | अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच। |
| भारतीय लाभ | फार्मास्यूटिकल्स और विमान पुर्जों जैसे क्षेत्रों में कुछ रियायतें। |
भारतीय उत्पाद जिन पर सबसे अधिक असर पड़ेगा
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि भले ही पुरानी ‘इमरजेंसी’ शक्तियां रद्द हो गई हों, लेकिन भारत के साथ हुआ 18% टैरिफ वाला समझौता (जो फरवरी 2026 की शुरुआत में तय हुआ था) प्रभावी रहेगा।
1. कपड़ा और परिधान (Textiles & Apparel)
यह क्षेत्र अमेरिका को भारत के सबसे बड़े निर्यातों में से एक है।
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प्रभाव: भारतीय कपड़ों पर 18% का प्रभावी टैरिफ बना रहेगा।
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चुनौती: हालांकि वियतनाम (46%) और बांग्लादेश (37%) जैसे प्रतिस्पर्धियों पर इससे भी अधिक शुल्क हैं, लेकिन 18% का कर भारतीय MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) के मुनाफे को कम कर देता है।
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प्रमुख वस्तुएं: तैयार कपड़े, सूती धागे और घरेलू सजावट का सामान।
2. रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery)
अमेरिका भारतीय तराशे और पॉलिश किए गए हीरों का सबसे बड़ा खरीदार है।
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प्रभाव: हीरों और सोने के आभूषणों पर 18% शुल्क लागू रहेगा।
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असर: इससे भारतीय आभूषणों की कीमत अमेरिकी बाजार में बढ़ जाएगी, जिससे मांग में कमी आ सकती है। उद्योग को अब अपनी लागत घटाने या मार्जिन कम करने पर मजबूर होना पड़ेगा। ट्रम्प का नया ट्रेड ऑर्डर 2026
3. इंजीनियरिंग और मशीनरी (Engineering Goods)
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प्रभाव: औद्योगिक मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और बिजली के उपकरणों पर 18% का शुल्क लागू है।
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विशेष नोट: स्टील और एल्युमीनियम पर Section 232 के तहत 50% का विशेष सुरक्षा शुल्क अभी भी बना हुआ है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने प्रभावित नहीं किया है।
4. कृषि और समुद्री उत्पाद (Agriculture & Marine Products)
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प्रभाव: चावल, मसालों और फ्रोजन झींगा (Shrimp) जैसे उत्पादों पर भी नए व्यापार ढांचे के तहत शुल्क लगेंगे।
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फायदा: भारत ने बदले में अमेरिकी बादाम, अखरोट और फलों पर शुल्क कम करने का वादा किया है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ये चीजें सस्ती हो सकती हैं, लेकिन भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन होगी। ट्रम्प का नया ट्रेड ऑर्डर 2026
Trump signs sweeping 10% global tariffs after SC blow
सेक्टर-वार सारांश: एक नज़र में
| क्षेत्र | टैरिफ दर (अनुमानित) | वार्षिक निर्यात मूल्य (लगभग) | प्रभाव का स्तर |
| कपड़ा/परिधान | 18% | $9.6 बिलियन | उच्च |
| रत्न/आभूषण | 18% | $8.5 बिलियन | उच्च |
| इंजीनियरिंग | 18% | $10 बिलियन | मध्यम |
| फार्मास्यूटिकल्स | 0% – 5% (छूट) | $8 बिलियन | न्यूनतम |
| स्मार्टफोन/IT | 0% (छूट) | $10 बिलियन | न्यूनतम |
| न्यूनतम |
प्रमुख राहत: फार्मा और टेक्नोलॉजी
ट्रम्प प्रशासन ने कुछ रणनीतिक क्षेत्रों को इन भारी टैरिफ से छूट (Exemptions) दी है:
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दवाइयां (Pharmaceuticals): जेनेरिक दवाओं और जीवन रक्षक दवाओं को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने के लिए इन शुल्कों से बाहर रखा गया है।
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इलेक्ट्रॉनिक्स (Smartphones): भारत में बने आईफ़ोन (iPhone) और अन्य तकनीकी उत्पादों पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं है, क्योंकि अमेरिका चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को एक विकल्प के रूप में देख रहा है। ट्रम्प का नया ट्रेड ऑर्डर 2026
निष्कर्ष और अगला कदम
यद्यपि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रम्प को पीछे धकेलने की कोशिश की, लेकिन उनके द्वारा तुरंत घोषित 10% ग्लोबल टैरिफ और भारत के साथ 18% की विशेष डील ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि भारतीय निर्यातकों को राहत नहीं मिलेगी।
RoDTEP योजना (निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट)
यह योजना निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा सहारा है। सरकार ने इसे 31 मार्च 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है।
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कैसे मदद करती है: यह योजना निर्यातकों को उन करों (जैसे बिजली ड्यूटी, ईंधन पर वैट, मंडी शुल्क) का रिफंड देती है जो जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।
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रिफंड दर: यह उत्पाद के मूल्य (FOB) का 0.3% से 4.3% तक होती है।
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प्रमुख अपडेट: बजट 2026 में इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है ताकि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की कीमत प्रतिस्पर्धी बनी रहे। ट्रम्प का नया ट्रेड ऑर्डर 2026
2. निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission – EPM)
हाल ही में सरकार ने ₹25,060 करोड़ के परिव्यय के साथ इस नए मिशन की शुरुआत की है। इसके तहत सात मुख्य पहल की गई हैं:
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TRACE (अनुपालन सहायता): अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए परीक्षण और प्रमाणन लागत का 60% से 75% सरकार वापस करती है।
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FLOW (रसद और गोदाम): विदेशी बाजारों में गोदाम (Warehousing) बनाने के लिए 30% तक वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे डिलीवरी तेज और सस्ती होती है।
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LIFT (माल ढुलाई सब्सिडी): पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों के निर्यातकों को परिवहन खर्च पर ₹20 लाख प्रति वर्ष तक की छूट मिलती है।
3. PLI (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना)
यह योजना प्रत्यक्ष रूप से निर्यात करों को कम नहीं करती, लेकिन उत्पादन की लागत घटाकर निर्यातकों को मजबूत बनाती है।
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मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स: इस क्षेत्र में भारत सबसे सफल रहा है, जहां निर्यात ₹8.3 लाख करोड़ के पार पहुँच गया है।
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टेक्सटाइल और फार्मा: बजट 2026 में इन क्षेत्रों के लिए PLI आवंटन बढ़ाया गया है ताकि अमेरिका द्वारा लगाए गए 18% टैरिफ के बावजूद भारतीय उत्पाद सस्ते पड़ें। ट्रम्प का नया ट्रेड ऑर्डर 2026
4. बाजार पहुंच पहल (Market Access Initiative – MAI)
यह योजना निर्यातकों को नए देशों और नए ग्राहकों तक पहुँचने में मदद करती है।
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प्रदर्शनी और मेलों में सहायता: यदि कोई निर्यातक अमेरिका के अलावा अन्य देशों (जैसे यूरोप या मध्य पूर्व) में व्यापार बढ़ाना चाहता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में स्टाल लगाने और हवाई किराए का खर्च सरकार वहन करती है।
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MSME प्राथमिकता: छोटे निर्यातकों (MSMEs) के लिए विशेष कोटा और सहायता दरें अधिक रखी गई हैं ट्रम्प का नया ट्रेड ऑर्डर 2026
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व्यापारिक संरचना का सारांश (Final Snapshot for Business)
यहाँ बताया गया है कि 20 फरवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत के लिए चीजें कैसे बदल गई हैं:
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पुराना दंडात्मक टैरिफ (Punitive Tariff): 50% (अब पूरी तरह रद्द)।
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द्विपक्षीय समझौता दर (Bilateral Deal): 18% (यह ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच हुए विशेष समझौते के कारण बरकरार है)।
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नया ग्लोबल टैरिफ (Section 122): 10% (यह 24 फरवरी 2024 से लागू होगा, लेकिन भारत के लिए 18% वाली डील इसे ‘ओवरलैप’ करेगी)।
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